सिख मतों को साधने की जुगत में लगी भारतीय जनता पार्टी

Delhi NCR

नई दिल्ली। भाजपा ने जीटीबी नगर के पार्षद राजा इकबाल सिंह को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर पद का प्रत्याशी घोषित कर यह साफ संदेश दे दिया है कि वह सिख मतों के लिए किसी अन्य पार्टी पर आश्रित नहीं रहेगी। इकबाल शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के कोटे से पार्षद चुने गए थे। नए कृषि कानून के विरोध में शिअद बादल द्वारा गठबंधन तोड़ने के बावजूद वह भाजपा के साथ खड़े रहे। उन्होंने पार्टी हाई कमान के कहने के बावजूद सिविल लाइन जोन के चेयरमैन पद से इस्तीफा नहीं दिया था। बगावत के बाद भी अकाली नेतृत्व उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। अब भाजपा उन्हें महापौर बनाने का फैसला करके अकालियों की मुश्किल बढ़ा दी है। इसके साथ ही कृषि कानूनों के विरोध के बहाने भाजपा को सिख विरोधी साबित करने वालों को भी पार्टी ने जवाब दिया है।

2020 के विधानसभा चुनाव से टूटा गठबंधन

दिल्ली में भाजपा व अकाली मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं। गठबंधन के तहत विधानसभा चुनाव में चार और निगम चुनाव में आठ सीटों पर अकाली उम्मीदवार उतारे जाते थे। लेकिन, वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से यह गठबंधन टूट गया। बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में भाजपा चार सीट देने को तैयार नहीं थी। इस वजह से समझौता नहीं हुआ हालांकि, अकाली नेताओं का कहना था कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मतभेद की वजह से उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। इसके बाद में नए कृषि कानूनों के विरोध में शिअद बादल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने का एलान कर दिया। पार्टी हाई कमान ने निगमों में पद हासिल करने वाले अकाली पार्षदों को भी इस्तीफा देने का निर्देश दिया था।

पार्टी का आदेश मानते हुए शिअद बादल के प्रदेश अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका की पत्नी मनप्रीत कौर ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सामुदायिक और तहबाजारी समिति के डिप्टी चेयरमैन के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इनके इस्तीफे पर भी विवाद है क्योंकि निगम सचिव के सूत्रों का कहना है कि उनका इस्तीफा अब तक नहीं मिला है। दूसरी ओर इकबाल सिंह और परमजीत सिंह राणा (विशेष विधि एवं सामान्य प्रयोजन समिति के चेयरमैन) ने पद छोड़ने से साफ इन्कार कर दिया था। वहीं, कालका का कहना है कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव घोषित होने की वजह से इकबाल के खिलाफ लिखित कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन उन्हें मौखिक रूप से बता दिया गया था कि उनके लिए अब शिअद बादल में जगह नहीं है।

माना जा रहा है कि भाजपा का यह कदम दिल्ली के सिख मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश है। इससे पहले भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम में अवतार सिंह को महापौर बनाया गया था। अब इन दोनों नेताओं पर निगम चुनाव में सिखों को भाजपा के समर्थन में लाने की जिम्मेदारी होगी।

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